Short Stories

एक युग था

1 एक युग था कि शुभ्र केश (सफेद बाल), पीले पत्ते, मेघों का सृजन और ध्वंस तथा शव के दशर्नमात्र से भय से भयभीत हो वैरागी हो जाते थे। वर्तमान में घर के सामने श्मशान होने पर वैराग्य नहीं होता।
2 पहले वेश्यालय, मधुशाला एवं पानी की दुकान के सामने से निकलने मंे शर्म आती थी, अब मंदिर के सामने से निकलने में शर्म आती है।
3 पहले बहू के निकलने से पूर्व आवाज आती थी “दादाजी, हट जाइए बहू को निकलना है” अब आवाज आती है “बहू जी हट जाइए दादा को निकलना है”।
4 पहले सिंगल रोटी खा कर डबल दिखते थे अब डबल रोटी खाकर सिंगल दिखते हैं।

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