Short Stories

फूटी आँख विवेक की

एक सेठ जी के यहाँ प्रथम बार पुत्र उत्पन्न हुआ। उसकी खुशी में उन्होंने एक माह तक धर्म कथा का पं॰ मनीराम जी के तत्वाधान में समारम्भ कराया। कथा के अंतिम दिन विशेष उत्सव मनाया। उस दिन एक कंचन नाम की नर्तकी को भी बुलाया। उसने एक घंटे नृत्य किया उसमें उसको रुपयों की बौछार लग गई। राजा ने भी उसे तीन सौ रुपये  भेंट में दिये। यह देखकर पं॰ जी करम ठोककर कहने लगे – फूटी आँख विवेक की, कहा करे जगदीश। कंचनिया को तीन सौ, मनीराम को तीस।

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