Short Stories

जैसी दृष्टि-वैसी सृष्टि

बाप बेटे दोनों एक आम्र वृक्ष के पास से होकर चले जा रहे थे। वहां किसी आदमी ने एक पत्थर मारा, वक्ष में से एक पक्का आम गिर पड़ा।

यह देखकर लड़के ने कहा – पिताजी, दुनिया ऐसी ही है, उसमें ठोकर लगाओ तो झुकती है अन्यथा नहीं।

बाप ने कहा – बेटा, ऐसा क्यों नहीं सोचते कि सज्जन ठोकर लगाने वालों को भी मीठा फल देता है और उस पर रोष नहीं करता। दुर्जन का काम ठोकर लगाने का, सज्जन का काम दया करने का है।

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *