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राजा जनक विदेह कैसे?

एक बार मंत्री ने राजा जनक से पूछा-“महाराज, आप शरीरधारी होते हुए भी विदेह क्यों कहलाते हैं।”

जनक ने कहा-“तुम्हारे प्रश्न का उत्तर फिर कभी दे दूँगा।”

एक दिन राजा ने मन्त्री को भोजन के लिए आमंत्रित किया और भोजन के पूर्व नगर में घोषणा करा दी कि आज मन्त्री को फाँसी पर चढ़ाया जायगा। इस घोषणा को मन्त्री ने सुना तो वह बहुत दुखी हुआ। मन्त्री ने राजा के यहाँ जाकर भोजन भी किया, जिसमें राजा ने नमक नहीं डाला था किन्तु मृत्यु के भय से मन्त्री को कुछ पता नहीं चला।

राजा ने मन्त्री से पूछा -“भोजन में नमक आदि की कमी तो नहीं थी।”

मन्त्री ने कहा-“महाराज! मृत्युदंड के भय से मुझे कुछ पता नहीं कि शाक-सब्जी में नमक था या नहीं।”

राजा ने कहा- “यह मृत्यु भय तो मुझे भी लगा है, इसीलिये मेरा ध्यान शरीर की तरफ न जाकर आत्मकल्याण की ओर ही रहता है।”

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