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वैभव किसके साथ में जाएगा?

पिता की मृत्यु के समय राजकुमार भोज छोटे से बालक ही थे। अतः शासन-सूत्र भोज के चाचा मुंजराज के हाथों में था। मुज की देखरेख में भोज विद्याध्ययन कर रहे थे। एक दिन एक ज्योतिषी ने मुंज को बताया राजकुमार भोज भारत का बहुत बड़ा सम्राट बनेगा। यह सुनकर मुंज का चेहरा मुरझा गया। उसने सोचा – “भोज के राजा बन जाने पर राज्य मे मेरी तो कौड़ी कीमत भी नहीं रहेगी। अभी मैं केवल एक संरक्षक मात्र हूँ। अतः न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी।” यह सोचकर उसने अपने एक विश्वस्त अधिकारी से सलाह कर भोज को समाप्त करने का षड्यंत्र रच डाला। मुंज का मित्र घुमाने के बहाने राजकुमार भोज को भयानक जंगल में ले गया। एकांत जंगल में घोड़े से उतार कर उसने कहा – राजकुमार आज तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है। यह सुनकर राजकुमार चौंक उठा। राजकुमार ने पुछा – क्यों और कैसे?
उसने कहा – ज्योतिषी ने आपको भारत का भावी सम्राट बताया है। इससे आपके चाचा को अपना भविष्य अंधकारमय दिखने से उन्होंने आपको मार डालने को यहाँ भेजा है। भोज को अत्यधिक आश्चर्य हुआ। उसने कभी इस प्रकार से स्वप्न मे भी नहीं सोचा था कि पिता तुल्य मेरा पालन करने वाला राज्य के लोभवश ऐसा षड्यंत्र रच सकता है।
राजकुमार ने कहा – “मैं क्षत्रिय हूँ, मरने से नहीं डरता किन्तु एक संदेश लिखकर दे रहा हूँ इसे चाचा को दे देना।” भोज ने एक पत्ते पर अपने रक्त से लिखा – “महाप्रतापी रावण के भी संग में वैभव नहीं गया। सम्राट सिकन्दर हाथ पसारे चला गया। बड़े-बड़े राजे-महाराजे इसे न ले जा पाये। किन्तु चाचा आप तो इसको साथ में ले जाने आए हो।” इस पत्र को पढ़कर अधिकारी भी पिघल गया। उसने कहा – मेरे से यह पाप नहीं होगा। किन्तु आपको मेरी एक बात माननी होगी कि आप जब तक समर्थ न हो जाएं, तब तक आपको हमारे यहाँ छिपकर रहना होगा। भोज ने स्वीकृति दे दी।
जंगल से वापस आकर वह अधिकारी मुंज के पास पहुँचा। मुंज ने पूछा – काम तमाम कर दिया। अधिकारी ने कहा – राजन्। आपकी आज्ञा का पालन करना मेरा परम कर्तव्य है। मुंज ने पूछ – भोज ने कुछ कहा तो नहीं? अधिकारी ने वह पत्र सौंपते हुए कहा – आपको यह पत्र दिया है। पत्र पढ़कर मुंज पछाड़ खाकर गिर पड़ा। उसके हृदय में यह लाइन गूंज उठी – “आप तो इसको साथ मे ले जाने आए हो।” वह कहन लग – हाय, मैंने राज्य के लोभ में अंधे होकर क्या अनर्थ कर डाला? अधिकारी ने पूछा – क्या आज भी आप उसे पुत्र मानते हैं। मुंज ने कहा – वह ही राज्य का स्वामी है। मुझे उसका राज्य नहीं चाहिए। अधिकारी ने भोज को लाकर उपस्थित कर दिया। मुंज ने भोज का राजतिलक करके अपने पाप का प्रायश्चित किया।

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