Short Stories

गुप्तदानी

फिराजेपुर के ला॰ देवीसहायजी ठंड के प्रारम्भ होते ही रात के समय शहर में जो आदमी फुटपाथ अथवा कहीं पर भी कपड़ों के बिना सिकुड़कर बैठा हुआ अथवा सोता हुआ मिलता तो दूसरे दिन उतनी रुई की भरी रजाई बनवाकर दूसरी रात को बारह बजे जाकर गरीबों को सोते समय उढ़ा आते। उन बिचारों को पता भी नहीं चलता कि कौन विशाल -हृदय दानी पुरुष यह रजाई उढ़ा गया है। इस तरह आप हमेशा गुप्दान करते रहते थे।

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