Short Stories

उजाला भी है

एक कछुआ पूर्णिमा का चंद्रमा देखने लगा तो उसे आश्चर्य हुआ कि मैं तो नदी में रहकर यह समझता था कि दुनियां में केवल अंधेरा ही अंधेरा है यहां तो उजाला भी है। उसने दूसरे कुछुओं से कहा – तो कोई मानने को तैयार नहीं, क्योंकि नदी के भीतर उन्होंने कभी उजाला देखा ही नहीं था। एक समझदार कछुए ने उसकी बात मानकर ऊपर देखा तो वास्तव में उजाला था। उसने सबको दिखाया, तब सब मान गये। अपने भीतर भी ज्ञान सूर्य चमक रहा है।

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