Short Stories

करुणामय स्वामी

स्वामी विवेकानन्द मिश्र के दौरे पर थे। उस दिन वह काहिरा शहर में कहीं जा रहे थे कि रास्ता भूल गए। भटकते-भटकते वह एक गन्दे मोहल्ले में जा पहुँचे, जहाँ वेश्याएं रहा करती थी। वेश्याओं ने समझा कि वह भी ग्राहक हैं, सो उन्हें अपनी और आकर्षित करने लगी।

स्वामी जी निःसंकोच उनके पास चल दिए। वहाँ पहुँचने से पहले उनके हृदय की वेदना आँखों से पिघलने लगी। गला रूंधा गया। अपने साथियों से वह बोले, “ये ईश्वर की अभागी संताने हैं। शैतान की उपासना में भगवान को भूल गई हैं।”

स्वामी जी के इस दिव्य रुप को देखकर सभी वेश्याएं करूणा विव्ह्ल हो उठी और फूट-फूटकर रोने लगी। उन पर स्वामी जी का इतना प्रभाव पड़ा कि एक सप्ताह बाद ही मोहल्ले की वेश्याओं ने अपनी सम्पत्ति से गन्दी गली को एक सुन्दर सड़क में बदल दिया और शीघ्र ही वहाँ एक मठ और एक महिलाश्रम भी बनवा दिया।

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