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स्वावलम्बन

एक बार स्वामी सत्यदेव विदेश-भ्रमण पर गयें। वे अमेरिका के लोगों का स्वावलम्बन देखकर चकित रह गये। यह भावना उन्होंने वहाँ के बच्चों में भी देखी। एक दिन सिएटल (अमेरिका) में समाचार-पत्र बेचने वाले एक छः वर्षीय बालक ने उन से पूछा- “क्या आप समाचार-पत्र खरीदेंगे?”
उन्होंने उत्तर दिया- “नहीं चाहिए।”
“केवल एक सेंट (मुद्रा)। अधिक नहीं” बड़े करुण स्वर में वह बोला।
तब स्वामी सत्यदेव ने एक सेंट उसकी और बढ़ाते हुए पूछा- “क्या तुम्हारे माता -पिता बहुत गरीब हैं?”
उसने आश्चर्य से उनकी ओर देखकर पूछा- “क्यों”
“क्योंकि तुम समाचार पत्र बेच रहे हो” -स्वामी जी ने उत्तर दिया।
“क्षमा कीजिए, मेरे माता-पिता काफी संपन्न है। लेकिन उनकी संपत्ति पर निर्भर रह कर मैं अपने को पंगु बनाना नहीं चाहता।” यह कहकर वह आगे एक दूसरे सज्जन की ओर बढ़ गया
स्वामी जी बालक के स्वावलम्बन की भावना से बहुत अधिक प्रभावित हुए।

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