Short Stories

सुख दुःख दाता कोई न आन

मानसरोवर झील पर एक चकवी की विरह वेदना को देखकर पवनंजय ने अंजना की विरह वेदना का अनुभव कर अंजना की वेदना  को दूर करने के लिये अंजना के पास आकर विरह का दुःख दूर किया किन्तु भाग्य में तो दुःख ही लिखा था। गर्भवती अंजना को सास ससुर ने घर से निकाल दिया। साधन सुखी करने का जुटाया था, मिला दुःख । अतः कोई भी किसी को सुखी दुखी नहीं कर सकता। सभी अपने भाग्य से सुख दुःख का साधन पाते हैं।

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