Short Stories

सुख दुःख बाहर नहीं

दिल्ली में बिजली संकट चल रहा था। कनाट प्लेस में एक दुकान पर पूर्वी जर्मनी का राजदूत अपनी कार से उतरकर कुछ खरीदने लगा। और गर्मी से तड़प कर बोल उठा ओह गर्मी के मारे तो चैन नहीं है। किसी ने कहा-आप चाहें तो इस गर्मी मे भी दुःख नहीं होगा।

वह बोला- सो कैसे?

आपका ध्यान गर्मी की तरफ है तो गर्मी महसूस होती है। यदि आप अपना ध्यान किसी महत्त्वपूर्ण घटना में लगा दीजिये, गर्मी का दुःख नहीं होगा।

दूसरे दिन वह एक घटनापूर्ण उपन्यास पढ़ने बैठ गया। बिजली बन्द हो गई थी, किन्तु अशान्ति नहीं थी।

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