Short Stories

सहनशीलता

सुकरात एक माना हुआ दार्शनिक, पर उसकी पत्नी बड़ी ही क्रोधी स्वभाव की थी। एक बार एक बड़ा विद्वान सुकरात से मिलने गया। बतचीत चल रही थी कि पत्नी ने सुकरात से कुछ पूछा। जवाब से सन्तुष्ट न होकर कचरा पेटी लाकर उसने सुकरात पर उंडेल दी। सुकरात कुछ न बोला। आगन्तुक  ने बड़े दुःख के साथ कहा कि भई, कुदरत ने आप के साथ बड़ा अन्याय किया है। कहाँ तो आप चोटी के दार्शनिक और कहाँ आपकी गुस्सेल पत्नी? सुकरात ने बड़े शान्त भाव से कहा – नहीं भाई, ऐसा न कहो। इसीकी वजह से तो मेरी क्षमा भाव की परीक्षा होती है।

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