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स्थितिकरण

आचार्य श्री शांतिसागरजी के दीक्षा गुरु श्री आदिसागरजी ने मुनिदीक्षा के बाद किसी से यह सुना कि पंचमकाल मे 99 करोड़ मुनि नरक मे जायेंगे। इसे सुनकर वे मुनि पद छोड़कर घर आ गये और पत्नी से भोजन माँगने लगे। पत्नी ने इसकी सूचना गाँव में भेज दी। गाँव के एक चतुर गृहस्थी  चौगुले ने सारी परिस्थिति समझ कर सम्बोधित किया- कि शास्त्र में लिखा है कि मुनिपद धारण करे तो स्वर्ग में ही जाते हैं, किन्तु जो मुनि पदभ्रष्ट हो जाते है या मुनिपद को लजाते हैं वे  व्यक्ति नरक में ही जाते हैं। यह सुनकर आदिसागरजी ने पुनः दीक्षा लेकर मुनिचर्या का पालन प्रारम्भ कर दिया।

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