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शास्त्राभ्यास का सुफल

पूरानी घटना है। भोपाल की जैन महिला का विवाह दुसरे शहरमें हुआ था। वह मंदिर में दर्शन पूजन के बाद वहीं स्वाघ्याय करने बैठ  जाती। उसे स्वाध्याय करते देखकर सभी जैन महिलाएं उस पर व्यंग कसती, अरे अब महिलएं शास्त्र पढ़ने लगी। ये पंडतानी बनेगी।

उसने पति से कहा – यहाँ की सभी महिलाएं मेरी हँसी उड़ाती हैं मैं क्या मंदिर में स्वाध्याय करना छोड़ दूँ।

पति ने कहा – उन्हें अपना काम करने दो। तुम अपना स्वाध्याय चालू रखो। घर का थोड़ा काम मैं भी कर लिया करूँगा। उसने अनेक शास्त्र पढ़ने के बाद गोम्मटसार का स्वाध्याय प्रारंभ कर दिया। उसका क्षयोपशम ज्ञान इतना चमक उठा कि सभी लोग  अपनी शंकाओं का समाधान करते थे। जीवन भी उसका पवित्र बन गया था।

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