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शरीर की परख करने वाले चमार हैं!

अष्टाव्रक का शरीर गर्दन से लेकर पांव तक आठ जगह टेढ़ा था। एक बार वे जनक जी की सभा मे पहुँचे तो सभी सभासद लोग उनके टेढ़े-मेढ़े शरीर को देखकर जोर से हंस पड़े। यह देखकर अष्टाव्रक जी बोले – राजन्! मैं तो समझता था कि आपकी सभा में तत्त्वज्ञानी होंगे किन्तु यहाँ तो सभी चमार बैठे हैं, जो मेरे चमड़े की परख कर रहे हैं। यह सुनकर सभी लज्जित हो गये।

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