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कहाँ क्या शक्ति छिपी है?

भगवान महावीर को केवलज्ञान प्रकट हो चुका था, किन्तु दिव्यध्वनि नहीं खिर रही थी। इस प्रकार लगातार 66 दिन तक जब दिव्यध्वनि नहीं खिरी तो इन्द्र ने सोचा क्या बात है? भगवान की दिव्यध्वनि क्यों नहीं खिर रहीं है? तब वह वृद्ध ब्राह्मण  का रुप बनाकर गौतम ऋषि के पास पहुचा। जिसके 500 शिष्य थे।

इन्द्र ने प्रश्न किया महाराज-मैं जानना चाहता हूँ कि द्रव्य, तत्व, जीव, लेश्यायें, पदार्थ, अस्तिकाय व्रत, चारित्र के कितने भेद है और इनकी क्या परिभाषाएं है।

इसे सुनकर गौतम बोले-तुम्हारा गुरु कौन है? मैं उसी से शास्त्रार्थ करुँगा। इन्द्र के साथ गौतम समवसरण में आये और मानस्तम्भ देखते ही महावीर के प्रधान शिष्य (गणधर)बन गये । भगवान की तभी दिव्यध्वनि खिरी।

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