एक सभा में सुभाष चन्द्र बोस भाषण दे रहे थे। विरोधी पार्टी के आदमी ने उन पर जूता फेंका। इसके पहले कि वहाँ कोई गड़बड़ी फैले, नेता जी ने कहा कि जिस सज्जन ने यह उपहार भेजा है कृपा कर इसका जोड़ा भी भेज दें, नहीं तो यह (एक जूता) मेरे लिए बेकार रहेगा। उपस्थित जन समूह हँस पड़ा। आगे की कार्यवाही यथावत् शुरु हो गई।

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