एक बालक स्कूल से किसी की एक स्लेट पेन्सिल उठा लाया। उसने लाकर माँ को दिखाई। माँ  ने कुछ नहीं कहा। कुछ दिन बाद किसी की किताब ले आया। उस समय भी माँ ने कुछ नहीं कहा। इस प्रकार उसे चोरी करने की आदत पड़ गई। अब बड़ा होकर बड़ी बड़ी चोरियां करने लगा। चोरी, डाका, किसी की हत्या कर देना उसके जीवन का अंग बन गया। एक बार वह पकड़ा गया। और एक हत्याकाण्ड में उसे फाँसी की सजा मिली। फाँसी के समय उसे 10 मिनट का समय दिया गया कि उसे कुछ किसी से कहना सुनना हो तो वह कह सकता है। उसने कहा- मैं माँ से मिलना चाहता हूँ । उसे उसकी माँ से मिलाया गया। उसने कहने के बहाने से दाँतों से माँ का कान काट लिया। और कहा- कि यदि माँ ने मुझे पहले दिन पेन्सिल की चोरी करते समय ही रोक दिया होता तो आज यह मौका नहीं आता।

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