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संसार के रिश्ते

राजा कीर्तिधर ने शिशु को राजतिलक कर मुनि दीक्षा ले ली। इससे रानी सहदेवी को बड़ा दुःख हुआ। रानी को जब यह पता चला कि उनका पुत्र सुकौशल किसी मुनि को देखते ही दीक्षा ले लेगा तो उसने चार माह के उपवास के पश्चात आहार को आये पति मुनि कीर्तिधर को नगर में आने से रोक दिया। जब सुकौशल ने यह समाचार सुना तो वह दौड़ता हुआ अपना पिता मुनि कीर्तिधर के पास पहुँचा और मुनि दीक्षा लेकर तप करने लगा । सहदेवी इस दुख से मरकर सिंहनी हुई। एक दिन वन में दोनों मुनियों को आहार को जाते देखकर सिंहनी ने सुकौशल को चीर फाड़ दिया। सुकौशल मौक्ष चले गये। सिंहनी को कीर्तिधर मुनि ने संबोधित किया तो शेरनी ने सन्यास धारण कर लिया। देखो संसार की दशा, जिस पुत्र मोह से मरी, शेरनी बनकर उसी को खा लिया।

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