एक सन्त के पीछे एक दुष्ट आदमी गाली देता हुआ चल रहा था। शान्त भाव से सन्त सुनते हुए चले जा रहे थें। गाँव आया, सन्त रुक गये, दुष्ट आदमी से बोले – तुम्हें जितनी गालियाँ देना हो दे लो। ऐसा क्यों? दुष्ट बोला। सन्त बोले – इस गाँव के आदमी मुझे पहिचानते हैं, वह तुम्हारे मुँह से गाली सुनेंगे तो तुम्हे मारेंगे। दुष्ट आदमी सन्त के चरणों में गिर पड़ा और क्षमा मांगी।

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