Short Stories

भारत का सन्यासी

स्वामी विवेकानन्द जब इंग्लैंड में थे। वे कुछ स्नेही साथियों के साथ गांवो के अन्दर दौरा कर रहे थे। उस समय एक बहुत ही बलिष्ठ सांड उधर दौड़ता हुआ आ रहा था। उस सांड को अपनी और आता देखकर उनके साथ वाले व्यक्ति भयभीत होकर इधर-उधर भागने से एक बालिका भीड- भाड़ की टक्कर में जमीन पर गिर पड़ी। स्वामी जी ने देखा जिधर बालिका भूमि पर पड़ी है, उधर ही सांड दौड़ता हुआ  आ रहा हैं। स्वामी जी का दयालू हृदय द्रवित हो उठा। वे वहीं पर सांड के सामने खड़े हो गए। सांड एक क्षण रुक गया और दूसरे क्षण ही दुसरे मार्ग की ओर चल पड़ा। एक बच्ची के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाने वाली स्वामी जी के अद्भुत साहस को देखकर सभी चकित हो गये। सभी के मुंह से ये स्वर फूट पड़े- “धन्य है भारत का सन्यासी”।

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *