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रात्रि भोजन -एक भयंकर पाप

वनमाला से विवाह कर लक्ष्मण वन में राम के साथ अन्यत्र जाने लगे तो वनमाला ने कहा – हृदयेश्वर! आप कितने समय बाद लौटकर आवेंगे। लक्ष्मण ने अनेक शपथों की साक्षी देकर वनमाला को समझाया कि मैं अवश्य 12 वर्ष में लौट आऊँगा, किन्तु वनमाला को इससे सन्तोष नहीं हुआ।

तब अन्त में लक्ष्मण ने कहा-’वनमाले! यदि मैं 12 वर्ष में लौटकर न आऊँ, तो मुझे रात्रि भोजन करने का पाप लगे। इस शपथ को मानकर वनमाला ने लक्ष्मण को अन्यत्र जाने दिया। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि रात्रि भोजन कितना बड़ा पाप है!

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