Short Stories

अपराध की सजा

लालबहादुर शास्त्री को कभी क्रोध करते नहीं देखा गया। एक बार वे तांगे में बैठकर कहीं जा रहे थे। तांगेवाले की नीयत में खराबी आ गई इसलिए वह तांगे को बहुत घुमाकर ले गया और आठ आने के बजाय दो रुपये किराया बताया। शास्त्री जी को गुस्सा आ गया, उन्होंने कहा, बेईमानी करता है, उसी समय एक चांटा भी उन्होंने तांगेवाले को जड़ दिया। पीछे पश्चाताप करने लगे। तांगेवाले ने कहा – आप आठ आना ही किराया दे दीजिये। शास्त्री जी ने कहा – ये दो रुपया ही ले, आठ आना किराये का और डेढ़ रुपये क्रोध करने का जुर्माना।

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *