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दर्शन पूजा का नाटक

एक सेठ जल्दी जल्दी में पूजा कर रहे थे क्योंकि उनको कहीं जाना था, किन्तु पूजन का नियम भी निभाना था। जब भोजन करने बैठे तो पत्नी ने पूछा क्या भगवान की पूजा कर आये हो? सेठ ने कहा मैं पूजा करके ही आ रहा हूँ। तुम्हारी दस मिनट में पूजा हो गई। मैंने देखा आप ऐसे पूजा कर रहे थे जैसे डाकू पीछा कर रहे हों, और तुम जान छुड़ाकर भाग रहे हो। दूसरे काम रूचि पूर्वक करते हो और भगवान की पूजा में दिखावटी नाटक। धर्म की बला टालते हो। जाओ पूजा करके आओ। जितने शब्द निकले उतने भाव निकले, तब भक्ति होती है।

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