Short Stories

गर्व किस पर ?

एक सम्राट मुनिराज के पास उपदेश सुनने के लिये पहुँचे। सम्राट ने बड़े गर्व से अपना परिचय दिया। मुनिराज ने पूछा – “तु रेगिस्तान में भटक जाय और प्यास से दम घुटने लगे और उस वक्त कोई गन्दे नाले का एक लोटा पानी लाकर तेरे से कहे – ‘इस लोटे भर पानी का आधा राज्य है।” मैं तुरन्त वही पानी ले लूंगा। सम्राट ने कहा। फिर मुनिराज ने कहा – “यदि वह सड़ा पानी पेट में जाकर रोग उत्पन्न कर दे और तू मरणासन्न हो जाये और उस समय एक हकीम पहुँचकर कहे की अपना आधा राज्य दे दो तो तुम्हें ठीक कर सकता हूँ।” राजा बोला – “उसे आधा राज्य देकर अपने प्राणो की रक्षा करुँगा। जीवन ही नहीं तो राज्य किस काम आयेगा?” तब मुनिराज ने समझाया कि जो एक लोटे सड़े पानी और उससे उत्पन्न रोग के लिये दिया जा सके ऐसे तुच्छ राज्य पर गर्व कैसा?

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