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बिना तैयारी के चलना

महाराज जीवंधर का राज्य उनके मन्त्री काष्ठांगार ने धोखा देकर उनके पिता से ही छीन लिया था। जीवंधर का पालन पोषण एक सेठ परिवार में हुआ था। उनको आर्यनदि गुरु ने शिक्षित दीक्षित किया था। एक दिन उनके गुरु ने यह बतला दिया कि यह तो तुम्हारा ही राज्य है। तुम इस राज्य के अधिकारी हो। यह सुनकर जीवंधर कुमार को जोश आ गया। वे काष्ठांगार से युद्ध करने को तैयार हो गये। तब गुरु आर्यनंदि ने कहा- तुम भी वैसी ही मूर्खता कर रहे हो, जैसे कोई बिना तैयारी के (सम्यग्दर्शन) के बिना चारित्र धारण कर लेते हैं। 1 वर्ष तक तैयारी करो फिर युद्ध करना।

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