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प्रायश्चित

लोहाचार्य ने अपनी उदर पीड़ा से पीछा छूटते न देखकर अपने गुरु से समाधिमरणकी प्रतिज्ञा ले ली किन्तु समाधिमरण की अवस्था में उपवास करने से उनकी व्याधि दूर हो गई। अब प्रतिज्ञा भंग की स्थिति में गुरु ने प्रायश्चित दिया कि सवा लाख विधर्मियों को जैन धर्म  में दीक्षित करो, यही तुम्हारा प्रायश्चित होगा। लोहाचार्य ने सवा  लाख व्यक्ति जैन धर्म में दीक्षित करके अपना प्रायश्चित पूरा किया।

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