Short Stories

प्रकाश और अंधकार

एक चोर था जो हमेशा चोरी करता था। उसका एक लड़का था जो पढ़ता था और काफी होशियार था। पढ़ाई, पूरी करने के बाद नौकरी की तलाश करने के लिए निकला, बहुत कोशिश करने के बाद भी नौकरी नहीं मिली तो थककर घर मे बैठ गया। पिताजी ने कहा बेटा नौकरी नहीं मिली तो क्या हुआ, चल मेरे साथ मेरे काम मे हाथ बटा। बेटा चल दिया और शाम होते-होते एक शहर मे पहुँच गये। शहर के अन्दर प्रवेश किया तो पिताजी ने अपने पुत्र से कहा देख बेटा सामने जो लाईट जल रही है। उस कोठी से मैंने कई बार चोरी कर लाया और अच्छा माल हाथ लगा। चल आज उसी कोठी मे डाका डालते हैं। पिताजी की बात सुनकर पुत्र एकटक उसी इमारत के ऊपर जल रहे बल्ब को देख रहा था।
पिताजी ने कहा क्या सोच रहा है? जल्दी तैयार हो जा।
बेटा बोला – नहीं पिताजी! मैं चोरी नहीं करुँगा।,
पिताजी ने कहा – क्यों?
बेटा बोला – जिसके यहाँ से चोरी करके ले गये उसके घर मे आज भी रोशनी है और हमारे घर मे आज भी अंधकार है इसलिए मै अपने घर में मेहनत की कमाई से अंधकार को दूर कर दीपक जलाऊँगा।

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