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भारत की प्राचीन संस्कृति

जोगीदास खुमाण प्रसिद्ध लुटेरा था, किन्तु परस्त्री के लिए तो वह सगे भाई के समान ही था। एक बार वह मध्यान्ह के समय किसी खेत – खलियान मे से गुजर रहा था। उसने उस खेत मे एक नवयौवन रुपवती कन्या को काम करते हुए देखा।
कौन है जो निडर है।
जोगीदास की यह बात सुनकर तुरन्त ही उस कन्या ने कहा – “जहाँ मेरा भाई जोगीदास हाजिर हो वहाँ मुझे किससे भय हो सकता हैं? यह थी भारत की प्राचीन संस्कृति ! इस देश मे लुटेरे भी परस्त्री को बुरी नजर से नहीं देखते थे।

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