एक सज्जन बड़ी भक्ति पूर्वक पदमावती की पूजा करते रहते थे। मैंने पूछा-श्रीमान जी! इतनी भक्ति आप भगवान की तो नहीं करते, जितनी पदमावती देवी की करते हैं। उन्होंने कहा- वह धर्मात्मा की रक्षा करती है, इसीलिए उसकी भक्ति करते हैं। मैंने कहा-क्या किसी के पाप उदय को वह बदल सकती हैं? वे कहने लगे-सो तो नहीं बदल सकती है।

और जिसके पुण्योदय होगा उसको अनुकूल सामग्री मिलती ही है, फिर कौन किसको क्या दे सकता है। वह निरुत्तर सुनते रहे।

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