Short Stories

शांति का पाठ

एक महात्मा से पूछा गया-आप इतनी उम्र तक असंग, सहनशील और शांत  कैसे बने रहे? महात्मा ने कहा-जब मैं ऊपर की और देखता  हूँ तब मन में आता है कि मुझे ऊपर की और जाना है, तब यहाँ पर किसी के कलुषित व्यवहार से खिन्न क्यों बनूं? नीचे की ओर देखता हूँ कि सोने, उठने, बैठने के लिए मुझे थोड़े स्थान की आवशयकता है, तब क्यों संग्रही बनूं? आस-पास देखता हूँ तो विचार उठता है कि हजारों ऐसे व्यक्ति हैं जो मुझसे अधिक दुःखी हैं, व्यथित और व्यग्र हैं। इन्हीं सबको देखकर मेरा मन शांत हो जाता है।

Share:

Leave a Reply

%d bloggers like this: