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कुमारपाल की करुणापूर्ण सूझबूझ

जैन सम्राट कुमारपाल के राज्यकाल में भी कुछ लोग कंटकेश्वरी देवी के समक्ष पशुओं का बलिदान करते थे। नवरात्रि के समय कुमारपाल ने अपनी ओर से बहुत से पशु देवी के मन्दिर में शाम को बन्द करा दिये। सुबह जाकर सब जनता के समक्ष ताला खोलकर वे पशु निकालकर सबसे कहा – भाइयों! यदि देवी को पशु भक्षण करना होता तो वह रात्रि को सब पशुओं को खा जाती, किन्तु उसने ऐसा नहीं किया। इससे पता चलता है कि देवी पशुबली नहीं चाहती।

इस प्रकार जनता को समझाकर पशुबलि की प्रथा अपने राज्य में जनता की सलाह से हमेशा को बन्द कर दी थी ।

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