Short Stories

पर का कर्ता – नीच, अधम!

एक बार दाढ़ी अपने हाथ से बनाकर सिर के बाल छोटे कराने के लिए मैं नाई की दुकान पर गया। उसने मुझे देखते ही व्यंग कसा, पं. जी, अब तो घर-घर नाई पैदा हो गये हैं। अब आपको हमारी दुकान पर आने की क्या आवश्यकता है?
मैंने पूछा – कैसे?
उसने कहा – आपने बचत करने के लिए दाढ़ी बना ली है, अब बाल और काट लिया करें, पूरे पैसे बच जायेंगे ?
मैंने कहा फिर तो सभी महतर हो जायेंगे, क्योंकि सभी अपने हाथ अपना मलमूत्र साफ करते हैं।
वह बोला – जो दूसरों का मलमूत्र धोवे महतर तो उसे ही कहते हैं।
मैंने कहा – तब नाई भी वही है जो दूसरे के बाल बनावे।
इसी प्रकार जो दूसरे का काम करे (कर्ता बने) वही नीच और अधम है। जो अपना काम करे वह ज्ञानी है।

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