Short Stories

निमित्त उपादान में कुछ नहीं करता

एक मुनिराज विहार करते हुए नगर के पास से जा रहे थे। इतने में एक भक्त उनको देखकर चरणों में विनत हो अपने को भाग्यशाली अनुभव करने लगा। वहीं सामने किसी विधर्मी ने उन्हें देखकर घृणा से मुुंह फेर लिया। वहीं पास एक वेश्या जा रही थी, उसके मन में उनको देखकर कामवासना जागृत हो उठी। उन तीनों के भावों में निमित्त मुनिराज थे, किन्तु भाव अलग-अलग थे। तब एक जिज्ञासु को प्रश्न उठा कि यदि निमित्त कुछ उपादान में करता है तो फिर विधर्मी और वेश्या के विकारी  भाव बनाने वाले क्या मुनिराज हैं  या अपनी भावना के अनुसार भाव बने है?

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