Short Stories

कभी न बुझने वाली प्यास

जर्मनी के विख्यात कवि एवं दार्शनिक गेटे को वहां के राजा ने प्रसन्न होकर प्रधानमंत्री बना दिया। सैकड़ो प्रशंसको की भीड़ एकत्रित हो गई और गेटे को बधाइयां मिलने लगी। गेटे ने कहा – “जिन्दगी कभी न बुझने वाली प्यास है, वह कभी मिट्टी के प्याले से अपने को तृप्त करती है तो कभी सोने की झारी से।”
कुछ दिन बाद राजा किसी बात पर नाराज हो गए और गेटे को देश निकाला दे दिया। तब प्रशंसको की भीड़ नहीं थी। केवल उनकी पत्नी व कुत्ता रह गया। पत्नी रोने लगी तो गेटे ने कहा – “जिन्दगी कभी न बुझने वाली प्यास है, वह कभी मिट्टी के प्याले से अपने को तृप्त करती है तो कभी सोने की झारी से।”

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