Short Stories

नकली धर्मात्मा

लन्दन में शेक्सपियर का लोकप्रिय नाटक चल रहा था। वहाँ के धर्म-पुरोहित का मन उत्सुकता से भर गया। वह नाटक देखना चाहता था, पर उसने अपने उपदेश में नाटक देखने वालों की कटु आलोचना की और उसे बुरा बताया था। उसे एक उपाय सूझा। नाटक थिएटर के मैनेजर के नाम एक पत्र लिखते हुए उसने अनुरोध किया – मैं आपका नाटक देखना चाहता हूँ, पर वहाँ कोई ऐसी व्यवस्था है क्या, जिससे में नाटक देख सकूँ, पर दर्शक मुझे नहीं देख सकें।

मैनेजर ने उत्तर लिखा – आप यहाँ अवश्य आईये। आप जैसे लोगों के लिए पीछे चोर दरवाजा है और बैठने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था है। वहाँ बैठ कर आप दर्शकों की आँखों से बच सकते हैं, परमात्मा की नजरों से बच सकें ऐसी व्यवस्था हमारे यहाँ नहीं है।

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