Short Stories

मृत्यु से पहले

एक ब्राह्मण था। अध्ययन करने के लिए काशी गया। पढ़-लिखकर वह होशियार हो गया। अपने ग्राम में आया। स्थानीय लोगों ने उस ब्राह्मण का अभिनंदन करते हुए कहा – “हमारा  सौभाग्य  है कि पंडितजी संस्कृत विद्या में पारंगत होकर गांव में पधार गये हैं।” स्वागत और अभिनंदन के साथ-साथ कई महानुभावों ने इस खुशी में उन्हें रुपयों की थैलियां भेंट की। काफी मात्रा में द्रव्य देखकर ब्राह्मण ने अपनी स्त्री के  लिए स्वर्णाभूषण बनवा लिये। ब्राह्मणी के हृदय में प्रसन्नता का पार नहीं था। वह बांसों उछलती हुई रात-दिन उन आभूषणों को पहनकर गांव में भ्रमण करती रहती।

ब्राह्मण ने अपनी धर्मपत्नी को शिक्षा देते हुए कहा- “प्रिये! रात-दिन आभूषणों से लदे रहना उचित नहीं हैं, जमाना खराब है। कदम – कदम पर ध्यान रखना है – डर काया को नहीं, माया को है। कोई त्योहार हो अथवा तू अपने पीहर जाने वाली हो या किसी शादी-विवाह जाना हो तो गहने भले ही पहन लेना किन्तु इस प्रकार रात-दिन पहनकर आडम्बर प्रदर्शित करना बुद्धिमता नहीं है।”

किन्तु ब्राह्मणी अपने पति की हितकारी शिक्षा को जीवन में कहां ढालने वाली थी? वह पहले की भांति ही रात-दिन आभूषणों के नशे में चूर रहती। कुछ ही समय बाद  ब्राह्मणी शारीरिक दृष्टि से काफी मोटी हो गई। तब ब्राह्ममण ने फिर अपनी धर्मपत्नी से कहा – “प्रिये! तेरी शारीरिक मोटाई के कारण ये आभूषण जल्दी से खुल नहीं पायेंगे अतः इन सबको अभी धीरे-धीरे खोलकर अलमारी में रख दे। इसी में लाभ है।” किन्तु वह मूर्खा कहां मानने वाली थी ! आवेश में आकर जोर से तड़ककर बोली- “आप तो बड़े  बरपोक हैं आपको तनिक भी घबराने की जरूरत नहीं है। कदाचित् चोर भी आ जायेंगे तो मैं उसी वक्त आभूषणों को निकाल लूंगी किन्तु अभी मैं आभूषणों को नहीं खोलूंगी।”

कुछ ही दिनों के बाद घर में सचमुच चोर घुस गये। अब तो ब्राह्मणी घबरायी। चोर बोले- “जल्दी से आभूषण खोलकर हमको दे दो” अन्यथा हम आभूषणों सहित तेरा ही अपहरण कर लेंगे। ब्राह्मणी आभूषणों को जल्दी निकाल नहीं सकी, तब चोर ब्राह्मणी को ही अपहरण कर ले गये। बाद में आभूषण तो उन्होंने ले लिए, पर ब्राह्मणी के गले पर तलवार चला दी।

ज्ञानी संतो का कहना है कि मृत्यु आने से पहले-पहले जो व्यक्ति धर्म में प्रवृत्त हो जाता है, उसे कभी भी पछताना नहीं पड़ता।

यम के आने से प्रथ, कर लेना कुछ धर्म।

पछताओगे अन्यथा, है यह सच्चा मर्म।।

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *