Short Stories

यह मरण नहीं, जीवन है

सुप्रसिद्ध यूनानी दार्शनिक सुकरात को मृत्युदण्ड की घोषणा की जा चुकी थी। सुकरात को मृत्युदण्ड की सजा सुनकर उसके सभी शिष्य शोक सन्तप्त हो गये। जब सुकरात को प्याला दिया जा रहा था। तो एक शिष्य ने दुखी स्वर मे कहा कि आप निर्दोष मारे जा रहे हैं। सुकरात ने प्रेम जताते हुए कहा – अरे! क्या तू चाहता है कि मैं किसी दोष या पाप के लिए मारा जाऊं?

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