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दुःखी की सेवा – मानव धर्म

अब्राहम लिंकन जब किशोरावस्था में अपने सहपाठियों के साथ खेल रहा था तभी देखा कि सामने एक घोंड़ा खड़ा है, उस पर जीन तो कसा हुआ है पर उस पर कोई भी सवार नहीं है अब्राहम को यह समझते देर नहीं लगी कि हो न हो इसका सवार कहीं गिर पड़ा है या घोड़े ने गिरा दिया है। खेल रोककर जब यह बात अब्राहम ने साथियों से कहा तो आधे से अधिक लड़को ने उसका मजाक उड़ाया। जब गिरे हुए व्यक्ति को देखने अब्राहम खेल छोड़कर सड़क पर बढ़ने लगा तो केवल दो-चार लड़को ने ही साथ दिया । जब सड़क के आजू-बाजू कोई न दिखा तो वह लड़के भी अब्राहम को छोडकर, यह कहते हुए कि गिरा होगा कोई शराबी और अपने -अपने घर चल दिये।

अब अब्राहम सड़क छोड़कर पगडंडी के रास्ते इधर-उधर ढून्ढ रहा था तो उसे एक पत्थर के पास एक घायल आदमी दिखा जो दर्द के मारे कराह रहा था। इस समय तो मुझे इसकी मदद करना ही चाहिए – अब्राहम ने सोचा और उसे घर पर लाकर उसका इलाज करवाया। दुःखी की सेवा मानव-धर्म मानने वाला महामानव अब्राहम अमेरिका का राष्ट्रपति बना।

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