Short Stories

सत्वेषु मैत्री

सर प्रफुल्लचन्द्रराय कलकत्ता विश्वविद्यालय में (८००) मासिक वेतन पाते थे, किन्तु वे अपने खर्च में केवल ४० रुपया माहवार ही लेते थे। शेष धन निर्धन छात्रों को तथा विज्ञान संबंधी अनुसंधानो के लिए विश्वविद्यालय में दें दिया करते थे।

उनके मित्रों ने विवाह करने के लिए आग्रह किया तो वह कहने लगे-जो प्रेम का सागर विश्वव्यापी प्राणियों के लिए छलछलाता रहता है, विवाह होने पर वही पवित्र प्रेम दूषित होकर अपनी पत्नी और पुत्रों में सीमित रहकर गड्डे के पानी की तरह सड़ जाता है। वे आजन्म अविवाहित रहे।

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