Short Stories

पर पीड़ा सम पाप नहीं

बादशाह जहाँगीर ने पं. बनारसीदास की अहिंसा और सत्यवादी होने की बड़ी प्रशंसा सुनी थी। उन्होंने एक दिन पं. बनारसीदास को बुलाकर उनकी परीक्षा लेना चाही। बादशाह ने एक जिन्दा चिड़िया हाथ में लेकर बनारसीदासजी से पूछा – यह चिड़िया जिन्दा है या मुर्दा है? बनारसीदासजी ने सारी परिस्थिति समझकर कह दिया – यह चिड़िया मरी हुई है। आप तो मोटा झूट बोलते हैं? बनारसीदास ने कहा – यदि मैं सच बोल देता तो एक जीव की हत्या हो जाती। क्योंकि आप उस चिड़िया को मार देते, मुझे झूठा साबित करने के लिये। सत्य वही है जिससे जीव रक्षा हो।

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