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पेशा से वकील-जीवन से साधु

एक व्यक्ति अपनी अकेली विधवा चाची की सम्पत्ति हड़पना चाहता था। वह कई वकीलों के पास गया किन्तु संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला। तब उसने सोचा किसी नामी वकील से पैरवी कराना चाहिए। एक नामी वकील के पस वह पहुँचा और अपने कागज पत्र दिखाये। कागज पत्र पढ़कर वकील ने कहा – तुम बेसहारा की सम्पत्ति हड़पना चाहते हो? यह राक्षसी वृत्ति है, तुम्हें तो अपनी चाची की सहायता करना चाहिए और अपने भाग्य पर भरोसा रखना चाहिए। वह  आदमी इस सीख से उद्वेलित हो वापिस घर चला गया। वह वकील थे, डॉ. राजेन्द्रप्रसाद (भू . पू . राष्ट्रपति)।

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