Short Stories

पुण्य की चेरी लक्ष्मी

अकबर की राजसभा में एक सोने की पीकदान आई थी। बादशाह बार-बार पान की पीक उसमे थूक रहा था। एक पुरोहित यह तमाशा देख रहे थे। जब उनका धैर्य समाप्त हो चुका, तब गुस्से मे भरकर पुरोहित जी लक्ष्मी पर चिल्ला उठे – अरी मुर्ख! यहाँ जिन्दगी में थुकवा रही है, मैं रात -दिन पूजा करता रहता हूँ सो मेरी तरफ नजर उठाकर भी नहीं देखती। नाम लक्ष्मी है और काम मूर्खों के। एक विद्वान ने समझाया – पंडित जी, लक्ष्मी पूजा करने से नहीं आती, वह तो पुण्य के उदय से आती है।

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