Short Stories

दया का मूल्यांकन

एक बार द्वारका नगरी में एक सर्प निकल आया। लोग उसे पत्थरों से मारने लगे । एक दयालु ने उसे बचाने की दृष्टि से उठाया और जंगल में छोडो आया। यह देख एक व्यापारी ने उसे बुलाकर कहा, इसका पुण्य मुझे दे दो और बदले में जितनी मर्जी दौलत ले लो।

इस पुण्य की कीमत पुछने दोनों युधिष्ठिर के पास गए और सब कुछ सुना डाला, तब युधिष्ठिर कुछ निर्णय न कर पाने पर उन्हें श्रीकृष्ण के पास ले आए तथा सारी स्थिति बतलाई। तब वे बोले है युधिष्ठिर सुनो – सुमेरु पर्वत जितना सोने का ढेर तथा सम्पूर्ण पृथ्वी मंडल का राज्य भी दे दो तो भी केवल एक जीव का जीवन दान देने के पुण्य की बराबरी नहीं कर सकता।

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