Short Stories

अंडे किसी की थाती हैं!

एक बार पैगंबर साहब खुदा की याद में मस्त थे। उन्हें देखकर पास ही काम करने वाला एक श्रद्धालु किसान उनके दर्शन के लिए वहाँ आया। बंदगी बजा लेने के बाद भेंट स्वरूप उसने दो अंडे उनके सामने रखे,  अंडो को देखकर पैगंबर साहब को बड़ी वेदना हुई और उन्होंने उससे कहा- “तुझे यह कहाँ मिले ?”

“एक पेड़ के घोंसले में , साहब !”

“वहाँ उनकी माँ नहीं थी ?”

“थी साहब , नर -मादा दोंनो थे ।”

“जब तू ने अंडा उठाया तो उन्होंने क्या किया ?”

“चूँ चूँ कर रहे थे और चारों ओर चक्कर काट रहे थे ।”

“तेरे कितने बच्चे हैं ?”

“जी साहब तीन लड़के हैं”

” तेरे पास से कोई उन्हें हटा ले जाए तो कैसा लगेगा! ?”

“मुझे पीड़ा होगी साहब! मैं दुःख और शोक से बदहवास हो जाऊँगा !”

“उन्हें कोई आराम से तेरे घर वापस पहुँचा दे तो?”

“मुझे बड़ी खुशी होगी और मै ईश्वर को धन्यवाद दूँगा।”

“ये अंडे अगर तू वापस पहुँचा दे तो क्या होगा ?”

“पक्षियों को बड़ी खुशी होगी। वे आनन्द से नाच उठेंगे, ईश्वर के गुण गाएंगे।”

फिर पैगम्बर मौन रहे। वह किसान पैगम्बर को सलाम करके वहाँ से चल पड़ा उस तरफ, जहाँ से वह अंडा उठा लाया था, वापस सुरक्षित रखने के लिए, पक्षियों का खोया सुख वापस लौटाने के लिए।

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