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कौन किसका कर्त्ता है?

भरत चक्रवर्ती का पुत्र मारीच तीर्थंकर ऋषभदेव की दीक्षा के समय चार हजार राजाओं के साथ मुनि बन गया। ऋषभदेव के निरन्तर 1 वर्ष तक निराहार रहने से ये सभी चार हजार मुनि भ्रष्ट हो गये। सबसे पहले मारीच ही मुनिपद से भ्रष्ट होकर जटाजूट धारी साधु बना। भगवान ऋषभदेव को केवलज्ञान होने पर इनमें से 3999 मुनि फिर से सच्चे दिगम्बर साधु बन गये किन्तु मारीच भ्रष्ट ही बना रहा। उसके बाबा तीर्थंकर आदिनाथ ओर पिता भरत भी उसे मार्ग पर नहीं लगा सके। यह स्वतंत्र परिणमन का कैसा सुन्दर उदाहरण है।

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