Short Stories

किसी का दोष नहीं, अपनी करनी का दोष है

कृतांतवक्र सेनापति ने सीता को सिंह-वन में उतार दिया। सीता ने पूछा यहाँ कौन से तीर्थस्थान है, जो यहाँ उतरने को कह रहे हो। सेनापति ने कहा – स्वामी ने यहीं छोड़ने की आज्ञा दी है। सीता ने पूछा क्यों? सेनापति ने दुखी होते हुए कहा – लोग समझते हैं कि सीता रावण के कब्जे में रहकर निर्दोष कैसे रह सकती है। सीता ने कहा – ठीक है, यह सब तो अपनी करनी का संयोग है । स्वामी या आप दुखी न हो।

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