Short Stories

ताजमहल ही क्यों न हो

एक बार किसी साथी ने एक कीमती केलेण्डर लाकर भूगर्भ कार्यालय में लगाया। जिस पर स्त्री का वीभत्स चित्र था। चन्द्रशेखर आजाद ने देखते ही उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिये। साथी ने आक्रोश मे आकर कहा – “ऐसे मूल्यवान केलेण्डर के टुकड़े कर दिये”। आजाद ने कहा-“जहाँ कामुकता होगी, उसका यही हाल होगा, फिर भले रत्नजड़ित श्रृंगार हो अथवा देश का ताजमहल ही क्यों न हो”।

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