Short Stories

न्याय कभी दुखी नहीं होता

सुकरात की न्याय नीति की शिक्षा से शासक सिहर उठा। शासक ने कहा – यह लोगों को भड़काकर राज्य में विद्रोह फैला रहा है, इसलिए इसे बन्दी गृह में डाल दो और जहर का प्याला पिलाकर समाप्त कर दो।  बन्दीगृह में सुकरात का शिष्य  क्रीटो  पहुंचा और उन्हें मुक्त करके बोला – महात्मन्, अच्छा अवसर है, बन्दीगृह से बाहर निकलकर किसी अन्य स्थान में भाग जाईये। सुकरात ने कहा – यह कार्य सरकार के विरुद्ध है। मैं नहीं भागूंगा। हमें तो न्याय नीति पर चलना चाहिए। न्यायी कभी दुखी नहीं होता।

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *