एक बार एक रानी ने नदी में स्नान कर ठंड मिटाने के लिए एक गरीब के झोपड़ी में आग लगा दी। विचारा गरीब आदमी रोता हुआ महाराज भोज के दरबार में आया और उसने महाराज को अपनी दुख कथा कह सुनाई।

महाराज ने रानी को बुलाकर पूछा – तुमने इस गरीब की झोपड़ी  क्यों जलाई? रानी ने कहा – वह तो गंदी झोपड़ी जलाने के ही योग्य थी।

महाराज ने कहा-तुम अपने परिश्रम से वैसी ही झोपड़ी बनाकर खुद कमाकर एक माह उसमें  रहो, तभी तुम्हें गरीबों के दुख का अनुभव होगा।

राजा भोज ने रानी के आभूषण उतरवाकर एक पुरानी धोती पहनाकर झोंपड़ी बनाने को भेज  दिया गया।

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